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Atul’s Song A Day- A choice collection of Hindi Film & Non-Film Songs

Archive for the ‘Journey Song’ Category


This article is written by Sudhir, a fellow enthusiast of Hindi movie music and a regular contributor to this blog. This article is meant to be posted in atulsongaday.me. If this article appears in sites like lyricstrans.com and ibollywoodsongs.com etc then it is piracy of the copyright content of atulsongaday.me and is a punishable offence under the existing laws.

Blog Day : 3673 Post No. : 14559

ASAD 10th Anniversary Celebrations – 19
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मिले ना फूल
तो काँटों से दोस्ती कर ली॰ ॰ ॰

दस बरस पहले, एक सफर शुरू हुआ – एक सफर जिसका कुछ भी नियत नहीं था, कुछ निश्चित प्रयोजन नहीं था, कुछ आशा भी नहीं थी के ये सिलसिला जाने कब तक चले। बस सिर्फ एक धुन, और एक नग़मा – ले चला जिधर ये दिल निकल पड़े।

और साथ ये भी कह दिया कि मंज़िल कहाँ कहाँ रुकना है ऊपर वाला जाने॰ ॰ ॰

कुछ मालूम नहीं था ये सफर क्या शक्ल हासिल करेगा। क्या कोई हमसफर मिलेगा? मालूम नहीं, ये सोचा भी था के नहीं। लेकिन फिर भी क्या॰॰॰ एक ज़िंदगी का तार पकड़ कर चल दिये। और सोचा यूं कि चलते चलो चलता हुआ साहिल है ज़िंदगी। ये तो अच्छा किया कि दूर की सोची नहीं। अब तीन साल में क्या हो या पाँच सात साल में क्या होगा ऐसी हर फिक्र को धुएँ में उड़ाते हुये, बस एक दिन और एक गीत – इस क्रम पे चलना शुरू किया।

कहते हैं, जब कर्म और विचार में खोट नहीं, तो प्रकृति, दिशाएँ, तत्व, देव – सब कुछ ही साथ हो संबल देते है।  दस साल पहले जो सफर अकेले ही शुरू हुआ था, आज इन दस साल के बाद अब इसकी गिनती करोड़ों में होती है।  क्रम नहीं बदला, नीयत नहीं बदली – जो बदला वो बस यही के लोग साथ आते गये और कारवां बढ़ता गया।

दस साल बाद भी, आज कोई पूछे तो जवाब नहीं बदला – ये हँसता हुआ कारवां ज़िंदगी का न पूछो चला है किधर॰॰॰।

कितने पड़ाव आए और गुज़र गये, कितने ही मील पत्थर रास्ते में मिले और नज़रों से ओझल हुये।  इस सफर में हम कहाँ कहाँ से गुज़र गये – देस भी घूमा, दुनिया भी घूमी; सागर, नदियां, पर्वत, वादियाँ, जंगल और सैहरा, रास्ते और गलियाँ, पनघट और खलिहान, बाज़ार भी, मेले भी और अकेले भी – सब कोने छू लिए। कभी रेल में, तो कभी मोटर कार में, कभी घोड़े कि टापों के संग, तो कभी रिक्शे में। कभी बैल कि गाड़ी में घूमे, तो कभी तांगे के हिचकोले खाये। कशतियों में कभी झीलों का झरोखा, और कभी जहाज़ में समुद्र का दीदार किया। साइकल की सैर भी की, और कभी प्लेन से सारी धरती को देखा। और तो और, क्रेन, ट्रक और ट्रैक्टर को भी नहीं छोड़ा।

कभी हरी दर्शन को तड़पते मन देखे, कभी मदीने की दुआएं मांगी।  कभी बंजारों के गीत सुने, और तो फिर कभी सूफी के कलाम। बुद्ध कि शरण में गये तो कभी येशु के दर पे सर झुकाया। कभी सृष्टि के चित्रकार को ढूँढा, और कभी कर्म गति की शिक्षा सुनी। कभी शुक्राने फरमाए उस खुदा की बंदगी में, तो कभी ज़िंदगी से ऊब कर उसे खूब खरी खोटी भी सुनाई।

कभी किसी नाज़नीं से लहंगे कि फरमाइश सुनी, और कभी प्रेमी कि ज़ुबान से चाँद कि उपमाएँ। कभी बरसात ने दिल लुभाया, तो कभी बात बात में मैंने दिल तुझको दिया। कभी गर्मी की धूप से बचने की सलाह देखी, तो कभी बर्फ की सर्दी को दिल की आंच से कम होते देखा।

गोद में बच्चों को सुलाते हुये माँ कि लोरियाँ सुनी, तो कभी बच्चों से माँ के आँचल कि पुकार। नग़में सुने दोस्ती के और ग़ज़लें सुनी इश्क़ की।  मोहब्बत के जलवों से रोशन जन्नत के नज़ारे किए, तो कभी टूटे दिल के नालों ने हमें भी रुलाया।

कभी दिल मचला और झूम के गा उठा – किसान अपनी फसल देख के, फौजी छुट्टी पर घर जाते हुये, इक जवान दिल इश्क़ का इक़रार पा कर, और तो कभी बस इस कायनात की खूबसूरती पर।

कभी दिल रोया और रो कर गाया – भीख मांगते हुये बच्चे, कोई बिछड़ कर जाने लगा, कभी मोहब्बत के धोखे उठाए, और तो कभी किस्मत के थपेड़ों की शिकायत में।

कभी एक चोर की कहानी सुनी, कभी बिक्री वालों से उनकी उम्दा दलीलें सुनी, कभी मेहनतकशों की प्रेरणा भा गई, और तो कभी सड़क पे तमाशों के नज़ारे किए।

हुस्न की जल्वानुमाई देखि, तो कभी हुस्न के एहसान; कभी हुस्न की संगदिली ज़ाहिर हुई, तो कभी सिर्फ शिकवों का ज़िक्र हुआ। फ़लक पे सूरज चाँद और तारों की कहानी सुनी, तो कभी शराब की मस्ती शराबी की जुबानी सुनी।

फूलों से किसी कमसिन के चेहरे को मुक़ाबिल देखा, तो कभी किसी अल्हड़ की लापरवाह चाल से झरनों की उपमा हुई।

कसमें वादे होते देखे साँसों की हद तक, और कभी टूटे वादों के साथ दिल के टुकड़े बिखरते देखे।

कोई जश्न का मौका छूटा नहीं, कोई नाम अछूता रहा नहीं।

कभी धरती और देश के झंडे से बुलंद हुये, तो कभी इंसानी ज़ुल्म से हताश।

कभी शहीदों की कहानियाँ पलटीं, तो कभी भली आत्माओं का दर्शन किया।

सुख की घड़ियाँ, दुख के बादल; हंसी के लम्हे, आँसू की ढलकन; मिलने की खुशी, ना मिलने का ग़म; प्यार का झगड़ा, बेवफाई के ज़ख्म; बारात का बाजा, दिल का राजा; मंदिर का दीपक, खुदा से दुआएं; रिश्तों की संवेदना, और साथ ही वेदना; प्यार का फलसफा, और ज़िंदगी की तालीम।

कभी वो गीत में, कभी नज़्म में, कभी ग़ज़ल में, तो कभी भजन में, कभी ट्विस्ट में तो कभी डिस्को में; कभी क़व्वाली में, तो कभी सहगान में; कभी कविता जैसी लगी, तो कभी कथा जैसी; कभी तुम्हारी छवि दिखी, कभी उसकी; और तो ज़्यादा कहानी अपनी सी लगी।

दस साल। दस साल और पन्द्रह हज़ार उमंगें। रोज़ की नई नवेली। कभी लगता भी है कि पहले सुना था, लेकिन फिर भी लगता है नया सा। कितने सारे भावों की बरसात हुई है, क्या बेशुमार दौलत मिली है – दस साल में। नायाब खजाना है। और सोचो तो, शुरू कहाँ से किया था – “॰॰॰काँटों से दोस्ती कर ली॰॰॰”। मुनासिब ही तो है, ये दौलत काँटों से गुज़र के ही पाते हैं। और तमन्नाएं॰॰॰ उनका तो कहना ही क्या। कुछ मिल जाये, इसकी तो फिक्र कभी थी ही नहीं। बस एक ही बात, एक ही लगन॰॰॰ दिल चाहता है॰॰॰  साथ चलते रहें हम न बीते कभी ये सफर॰॰॰

जी हाँ, दिल चाहता है। जब एक गाना ढूंढ रहा था इस जश्न के लिए, तो मन बहुत घूमने के बाद इस बात पे ठहरा कि एक सफरनामा होना चाहिए, एक गाना जिस में बस सफर हो, कोई मंज़िल न हो। जिसमें बस हमख्यालों का दख़ल हो। जो सब मेरे हमकदम हों, मेरे हमनशीं, मेरे हमज़ुबाँ हों। अपनी यादों और आदतों से वहीं ढूँढता रहा साठ और सत्तर से पहले। इत्तेफाक़ देखिये, मिला तो बखूबी वही जो दिल चाहता है। हाँ ‘दिल चाहता है’ – फिल्म भी वही और नग़मा भी वही। 2001 में जारी हुई ये फिल्म मेंने उन्हीं दिनों में अपने सफरगुज़ारी के दौरान देखी। न जाने क्यों, इस फिल्म से मोहब्बत हो गई। और खास कर के इस गाने से। हल्की सी मस्ती की लहर में हल्का सा ढुलकता सा गाना, सुस्ताता हुआ, आलसी सा गाना, धीरे धीरे बहता जैसे बहार में सुबह कि मीठी सी सबा॰॰॰ लापरवाही में एक प्रतिबिम्बित चिंतन॰॰॰ गाना तो ऐसे मन को भाया के बस।

दिल चाहता है
कभी ना बीतें॰॰॰   चमकीले दिन
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी॰॰॰ यारों के बिन

होता है ना कभी कभी ऐसे ही। कुछ ऐसा कहा जाता है दो लफ्जों में, के और कुछ कहने की कसर बाकी रहती नहीं। जो बात मन की है, वो बस इतनी ही मुकम्मल है, जो ऊपर लिखे मिसरों में ब्याँ हो गई – तमन्ना है ये साथ चलते रहें हम न बीते कभी ये सफर॰॰॰

और कुछ कहना वाजिब नहीं।

इस फिल्म के ज़्यादातर किरदारों को पहली बार देखा था। बहुत सालों बाद एक हिन्दी फिल्म देखी थी शायद। मन को जम गई। 🙂

गीत जावेद अख्तर का लिखा है, संगीत बद्ध किया शंकर-एहसान-लोय कि तिकड़ी ने। गाने वाली आवाज़ शंकर महादेवन की है। स्क्रीन पर ये गाना बैक्ग्राउण्ड में फिल्माया गया। और क्या असरदार फिल्माया गया। गीत ही गीत सुनता है, बाकी सब खामोशी है। एक तुष्टि की, एक पूर्णता की खामोशी है। एक खुशी भरी सुस्ती की खामोशी है॰॰॰ जो दिल चाहता है वो मुझे मिला है॰॰॰ ऐसी खामोशी है

कभी ना बीतें॰॰॰   चमकीले दिन
हम ना रहें कभी॰॰॰ यारों के बिन

दस बरस, फिर एक और दस बरस, फिर एक और दस बरस॰॰॰ सिलसिलेवार

कभी ना बीतें॰॰॰   चमकीले दिन
हम ना रहें कभी॰॰॰ यारों के बिन

[Author’s Note: Apologies due on many counts, including the sudden and surprising change in the presentation language above. The writing started and then I just couldn’t stop the flow. And so I let it flow. In case there are requests, I can add the English translation also. Regarding the gap in celebration sequence, that story is coming up tomorrow. 🙂 ]

Song – Dil Chaahta Hai (Dil Chaahta Hai) (2001) Singer – Shankar Mahadevan, Lyrics – Javed Akhtar, MD – Shankar-Ehsaan-Loy
Chorus

Lyrics

dil chaahta hai

dil chaahta hai

dil chaahta hai
kabhi na beeten
chamkeele din
dil chaahta hai
hum na rahen kabhi yaaron ke bin
din din bhar hon
pyaari baaten
jhoomen shaamen
gaayen raaten
masti mein rahe dooba dooba hamesha samaa
hum ko raahon mein yun hi milti rahen khushiyaan
dil chaahta hai
kabhi na beeten
chamkeele din
dil chaahta hai
hum na rahen kabhi yaaron ke bin

jagmagaate hain
jhilmilaate hain apne raaste
ye khushi rahe
roshni rahe
apne waaste
jagmagaate hain
jhilmilaate hain apne raaste
ye khushi rahe
roshni rahe
apne waaste

oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo

jahaan rukey hum
jahaan bhi jaayen
jo hum chaahen
wo hum paayen
masti mein rahe dooba dooba hamesha samaa
hum ko raahon mein yun hi milti rahen khushiyaan

dil chaahta hai

dil chaahta hai

dil chaahta hai

dil chaahta hai

dil chaahta hai

kaisa ajab ye safar hai
socho to har-ek hi bekhabar hai
us ko jaana kidhar hai
jo waqt aaye
jaane
kya dikhaaye

oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo

dil chaahta hai
kabhi na beeten
chamkeele din
haan haan
dil chaahta hai
hum na rahen kabhi yaaron ke bin
din din bhar hon pyaari baaten
jhoomen shaamen
gaayen raaten
masti mein rahe dooba dooba hamesha samaa
hum ko raahon mein yun hi milti rahen khushiyaan
jagmagaate hain
jhilmilaate hain apne raaste
ye khushi rahe
roshni rahe
apne waaste
jagmagaate hain
jhilmilaate hain apne raaste
ye khushi rahe
roshni rahe
apne waaste

oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
(dil chaahta hai)
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
(dil chaahta hai)
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
(dil chaahta hai)
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo

dil chaahta hai

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Hindi script lyrics (Provided by Sudhir)
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दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है
कभी ना बीतें
चमकीले दिन
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी यारों के बिन
दिन दिन भर हों
प्यारी बातें
झूमें शामें
गायें रातें
मस्ती में रहे डूबा डूबा हमेशा समां
हम को राहों में यूं ही मिलती रहें खुशियाँ
दिल चाहता है
कभी ना बीतें
चमकीले दिन
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी यारों के बिन

जगमगाते हैं
झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे
रोशनी रहे
अपने वास्ते
जगमगाते हैं
झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे
रोशनी रहे
अपने वास्ते

ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है
जहाँ रुकें हम
जहाँ भी जाएँ
जो हम चाहें
वो हम पाएँ
मस्ती में रहे डूबा डूबा हमेशा समां
हम को राहों में यूं ही मिलती रहें खुशियाँ

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है

कैसा अजब ये सफर है
सोचो तो हर एक ही बेखबर है
उस को जाना किधर है
जो वक़्त आए
जाने
क्या दिखाये

ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss

दिल चाहता है
कभी ना बीतें
चमकीले दिन
हाँ हाँ
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी यारों के बिन
दिन दिन भर हों
प्यारी बातें
झूमें शामें
गायें रातें
मस्ती में रहे डूबा डूबा हमेशा समां
हम को राहों में यूं ही मिलती रहें खुशियाँ
जगमगाते हैं
झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे
रोशनी रहे
अपने वास्ते
जगमगाते हैं
झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे
रोशनी रहे
अपने वास्ते

ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
(दिल चाहता है)
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
(दिल चाहता है)
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
(दिल चाहता है)
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss

दिल चाहता है

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This article is written by Mahesh Mamadapur, a fellow enthusiast of Hindi movie music and a contributor to this blog. This article is meant to be posted in atulsongaday.me. If this article appears in sites like lyricstrans.com and ibollywoodsongs.com etc then it is piracy of the copyright content of atulsongaday.me and is a punishable offence under the existing laws.

Blog Day : 3647 Post No. : 14481

ASAD 10th Anniversary Celebrations – 3
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A journey of a thousand miles begins with a single step.
– Lao Tzu

main akela hi chala tha janib e manzil magar
log saath aate gaye aur karwaan banta gaya
– Majhrooh Sultanpuri

On 19 July 2008, a single step was taken by our Atul ji, the day on which the first song was posted on the blog. It was followed by yet another Roshan number the next day and the journey continues to this date and beyond, much akin to the above sh’er by Majhrooh Saab.

Looking back at the last decade, there is a deep sense of excitement and contention amongst all readers and especially the important contributors. However what is equally true is that the responsibilities and the hope of tracing and introducing obscure songs has only increased. This hope itself is the proof of the immense popularity that the blog enjoys all over the world.  I am sure the blog has become a one-stop destination for all readers in search for old Hindi songs and the correct and reliable information that it serves and continues to provide. About 4000 movies and nearly 15,000 songs covered, the blog has a visitors hits number of more than 10.5 million. Mind-blogging numbers indeed and one can only feel proud of being a part of this great musical extravaganza.

Since it is a special occasion of a decade of the blog’s existence, I suppose, I am at liberty to write a few words about my association with it.

Old Hindi Film songs were a common feature in my house, especially with SLBC and its special program ‘purani filmon ka sangeet’, which is played to this day and to which I am addicted to this day (ask our whatsapp group 🙂 ). With the advent of internet facility, the hobby of listening and gathering information naturally started dominating the searches. And, for people with music interest this blog was a no-escape and also a welcome addiction.

In the initial days, I just tried to absorb and admire the contents. It was not long that the longing to be a part of the blog started to grow. A few comments and corrections here and there started. Seeing that a lot of songs known to self were yet to be represented, I toyed with the idea of sending the lyrics. I ended up sending lyrics for 3-4 songs, but the greed to get more involved did not stop.

It was then that I starting writing posts. After a few posts and with the ideas and plots for writing posts difficult to come by, I started a mini-series on Mukesh and his composers. There is a small contribution of self in this series with 14 posts and 04 posts in another series titled Mukesh and his co-singers. Apart from the posts on Mukesh, I feel proud to have written about Rafi saab, Talat saab and Lata Mangeshkar. There are individual posts on Shamshad Begum, Uma Devi, etc. I have also written about Ghulam Mohammed and Shankar Jaikishan whose compositions, I enjoy immensely.

Of the 30 odd posts, “Sab Thhaath Pada Reh Jaavegaa” has had a great influence on me and especially the verses.

jo paaya hai wo baant ke kha
kangaal na kar kangaal na ho o
jo sab ka haal kiya toone
ek roz wo tera haal na ho o

is haath se de us haath se le
ho jaave sukhi ye jag saara

There was time when some songs of Mukesh were not to my liking. This view is particularly for a few songs at the fag end of his career wherein you find him singing all types of songs without the Midas touch of late 1940’s and 1950’s. Not having understood the lyrics properly, I had counted the above song also in that category. However, while writing the post and especially after Sudhir ji’s English translation, the song seems to be nothing short of philosophy of life that one must follow.

And then, “Lo Mil Gayi Degree Pyaar Ki” had its own story before it was put up as a post. A virtual Kishore Kumar solo was converted into a Mukesh post just because he had two words in the song. It was the last song of Mukesh-Roshan to be introduced to the blog and there was no way, I could lose the opportunity. Many eminent personalities were contacted who held different views on how Mukesh could fit in as he was not part of the movie etc.

Lastly, “Gokul Nagri Jaana” remains the oldest song sung by Mukesh on the blog. I have special memories of writing this post, as I was aware that I had touched upon a gold mine of 06 special songs of his career. Two of them remain untraced to date, but then there have been many surprises on this blog and I am sure all six will be accounted for.

The past year has been hectic for me from job and work point of view. However, with this post, I have barely managed to avoid the guilt of not having contributed for an entire year. I expect saner time allotment for this hobby again.

Coming back to the blog, I consider the following to be a few unique and unparalleled aspects about it.

  • Accuracy and authenticity of the contents
  • Complete and correct lyrics
  • Responsible, authoritative and sound contributors
  • The classification and arrangement of songs under various heads
  • Easy accessibility of information on Hindi songs
  • Common platform for like-minded Hindi songs enthusiasts
  • Due recognition and importance accorded to various artists
  • Accurate statistics of songs and artists contribution.

There could more important USP’s of the blog; however, the following two aspects are also quite important.

  • Opportunity for contributors to pen their thoughts on the blog
  • A unique friendship circle amongst the regulars

I think every reader and especially the contributors can never thank Atul ji and Sudhir ji enough, to acknowledge and appreciate the opportunity given to us to pen down our thoughts and represent songs on the blog. This is a very selfless and noble deed of Atul ji. Like-minded people met online on this blog and started a very special and unique circle, with quite a few sessions, visits etc. A whatsapp group is also formed with a few of the regulars and is more active than the blog itself now. 🙂

For me personally, the opportunity to interact with Mr. Harish Raghuwanshi ji was a great personal fulfilment. He has always helped me with my lists in the posts and also with information which would have been nearly impossible to trace elsewhere. Similarly, being in touch with eminent film historians and authors and knowledgeable personalities such as Shri Arun Kumarji, Harmandir Singh ji and many others has added new dimensions to our lives. In a fast moving world with technological advances, catching up with matters of yesteryears is so soothing and heart fulfilling. When we talk of ‘good old days’, here is a platform that binds us together.

Coming back to the series on Mukesh, a sort of regret that will always remain with me is not having a post on the collaboration of Mukesh with composer Anil Biswas. People fond of Hindi music need no explanation to elaborate the influence of Anil Da and stepping stone in Mukesh’s singing career with reference to “Dil Jaltaa Hai To Jalne De”Of the 22 odd songs that Mukesh sang for Anil Da, all have been covered on the blog. Not to give a sense of false hope, I would like to clarify that the song that I am presenting here today has nothing to do with Mukesh.

Instead, I would like to write on Anil Biswas.

What can one write about the ‘Bhishm Pitamah’ of Hindi film music that has not been written earlier. A pioneer of playback singing in India and the composer who gave the initial breaks to singers like Parul Ghosh, Meena Kapoor, Mukesh, Talat Mahmood, Sudha Malhotra etc. He is credited with coaching Lata Mangeshkar with breath control techniques during recording of songs. Begum Akhtar’s timeless classics in the film ‘Roti’ (1942) were scored by him. Mukesh, Talat Mahmood, Suraiya et al have sung several of their classic songs under his composition. Lata having sung under various composers has a lot of numbers under his composition too and these songs will always remain on a higher plane. The fame achieved by the songs in ‘Kismet’ (1943) will be discussed and mentioned for a very long time.

There is enough material on the net on Anil Biswas, his life in Mumbai and Delhi, the many pioneering aspects of his compositions, how the mighty composers of later-years were his assistants earlier etc. And then there is also a detailed wikipage dedicated to him. However, I would like to draw the attention of readers to AK ji’s blog songsofyore.com.

Seventh of July, last week was the birth anniversary of Anil Da. Four years back, 2014 was his centenary year and the AK ji’s blog has a wide range of tributes and had dedicated an entire year on Anil Biswas starting with his daughter’s introductory post which one can find here. The eighth and last post on this special series can be found here.

The last post referred above also contains in its first paragraph links to the other six posts on Anil Biswas posted in his centenary year. I think die-hard fans of Anil Da can look no further than these posts to enjoy the complete range of his compositions for various artists and well himself.

Yes, he did sing for himself and I present here one such song composed and also sung by him.

I have no words to express my happiness in writing this post and introducing the song composed as well as sung by Anil Biswas to the blog. The immense gratitude to Atul ji and Sudhir ji for giving me yet another opportunity to write goes without saying.

This solo song is from the film ‘Ek Hi Raasta’ (1939). Only one of the potential twelve songs in the film has been posted on the blog so far and this is only the second song from the film to be posted.

To conclude the post, I once again congratulate Atul ji and Sudhir ji on this stupendous achievement of one decade of existence of the blog. There is a long way to go and many more milestones to be achieved. As we complete one decade of existence and march into the second, then to silver jubilee and beyond, the journey itself has become the destination for Atulites.

Long live the music of vintage and golden era, long live the passion of Atulites and long live the longevity of the blog. 🙂


Song – Bhai Hum Pardesi Log Hamen Kaun Jaane  (Ek Hi Raasta) (1939) Singer – Anil Biswas, Lyrics – Pt Indra Chandra, MD – Anil Biswas

Lyrics

bhai hum pardesi log
hamen kaun jaane
o bhai hum pardesi log
hamen kaun jaane
na koi apna na koi apni..ee..ee
sabhi paraaye log
na koi apna na koi apni
sabhi paraye log
hamen kaun pehchane re  
bhai hum pardesi log
hamen kaun pehchane re
bhai hum pardesi log  
hamen kaun jaane
 
khud hi rijhaaen khud man jaaen
chaahe ramaaye jog
khud hi rijhaaen khud man jaaen
chaahe ramaaye jog
chaahe bane diwaane re bhai
chaahe bane diwaane re bhai
hum pardesi log  
hamen kaun jaane
 
sab se milte phir bhi akele..ey..ey
sab se milte phir bhi akele..ey..ey
apne dil ka rog  
apne dil ka rog
koi kya jaane re bhai
koi kya jaane re  
bhai hum pardesi log  
hamen kaun jaane
o bhai hum pardesi log
hamen kaun jaane  
na koi apna na koi apni
sabhi paraaye log
na koi apna na koi apni
sabhi paraaye log
hamen kaun pehchane re
bhai hum pardesi log
hamen kaun pehchaane re
bhai hum pardesi log
hamen kaun jaane
o bhai hum pardesi lo..o..ogg

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Devnagri script lyrics (Provided by Sudhir)
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भई हम परदेसी लोग
हमें कौन जाने
ओ भई हम परदेसी लोग
हमें कौन जाने
ना कोई अपना ना कोई अपनी॰॰ई॰॰ई
सभी पराये लोग
ना कोई अपना ना कोई अपनी
सभी पराये लोग
हमें कौन पहचाने रे
भई हम परदेसी लोग
हमें कौन पहचाने रे
भई हम परदेसी लोग
हमें कौन जाने

खुद ही रिझाएँ खुद मन जाएँ
चाहे रमाएं जोग
खुद ही रिझाएँ खुद मन जाएँ
चाहे रमाएं जोग
चाहे बने दीवाने रे भाई
चाहे बने दीवाने रे भाई
हम परदेसी लोग
हमें कौन जाने

सबसे मिलते फिर भी अकेले॰॰ए॰॰ए
सबसे मिलते फिर भी अकेले॰॰ए॰॰ए
अपने दिल का रोग
अपने दिल का रोग
कोई क्या जाने रे भाई
कोई क्या जाने रे
भई हम परदेसी लोग
हमें कौन जाने
ओ भई हम परदेसी लोग
हमें कौन जाने
ना कोई अपना ना कोई अपनी
सभी पराये लोग
ना कोई अपना ना कोई अपनी
सभी पराये लोग
हमें कौन पहचाने रे
भई हम परदेसी लोग
हमें कौन पहचाने रे
भई हम परदेसी लोग
हमें कौन जाने
ओ भई हम परदेसी लो॰॰ओ॰॰ओग


This article is written by Sadanand Kamath, a fellow enthusiast of Hindi movie music and a contributor to this blog. This article is meant to be posted in atulsongaday.me. If this article appears in sites like lyricstrans.com and ibollywoodsongs.com etc then it is piracy of the copyright content of atulsongaday.me and is a punishable offence under the existing laws.

Blog Day : 3647 Post No. : 14478

ASAD 10th Anniversary Celebrations – 2
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On the occasion of completing 10 years of the blog on July 19, 2018, I heartily congratulate Atul ji and his musical bandwagon for attaining a very important milestone.

The blog started with the intent of posting at least one song a day. At the time of joining the blog in July 2011, I felt as to how Atul ji could make a commitment of posting one song a day. With family responsibilities, a transferable job with chances of getting posted at not-so-internet-friendly places, the target of one song a day was not so easy as it looks. To my pleasant surprise, the target of posting one song a day (actually more) on the blog has been, more or less, adhered to with a punctuality of more than 98 per cent. My assessment is that there may be, on average, not more than 10 days in a year when songs were not posted on the blog. But the team of regular (and irregular) contributors to the blog have more than compensated by an average posting of nearly 4 songs per day during the last 10 years.

I got to know from the special posts written by Atul ji on the occasions of the celebrations of blog’s anniversaries and milestones that during the initial period of the blog, the response was not as per his expectation. At that time, as I understand from his write-ups, Raja ji’s encouraging words inspired him not to lose heart and to do his karma. Later on, as I have witnessed, the visitors to the Blog increased manifold. Presently, the number of visitors to the Blog have crossed well over 10.5 million (more than one crore). Coupled with the total number of films and songs covered, this blog is the primus inter blog (first among the blogs) covering Hindi films and non-film songs.

I consider myself very fortunate to be associated with the musical journey of the blog for the last 7 years. Based on my experience, I would say that one of the greatest contributions of the blog has been the creation of interest in Hindi film songs of pre-golden era period. When I joined the blog in July 2011, I found it interesting, amongst others, Arun ji’s well-documented informative posts about the Hindi films and their artists, especially of the pre-golden era period. I do not think that information on many of the films and artists covered in such articles is available in any other blogs on Hindi films.

On the occasion of a decade of this musical Blog, I have chosen one of my favourite songs from Hindi films of post-2000 period. This song has been my inspirational song during my Himalayan treks. The song is from the film ‘Swades’ (2004). I am reproducing the full mukhda of the song to bring out the relevance of these inspirational lines in the context of the musical journey of the blog:

yunhi chala chal raahi
yunhi chala chal raahi
kitni haseen hai ye duniya
bhool saare jhamele
dekh phoolon ke mele
badi rangeen hai ye duniya

Apparently this song is also a ‘journey song’. The hero, Shahrukh Khan is on a journey in a self-driven caravan (camping vehicle) to locate his Nanny in one of the remote villages in India. On the way, he is joined by a faqeer (Makarand Deshpande) to help him find the correct direction to his destination (he has been intentionally misguided in the earlier part of the film 🙂 ). What starts as a song being heard from the radio on vehicle’s dash board, it becomes a voice over to Shahrukh Khan (playback by Udit Narayan) and Makarand Deshpande (playback by Kailash Kher). Hariharan’s voice is used at the start of the song for lines heard from the dash board, and a line in-between the song and towards the end. The song is written by Javed Akhtar which is set to music by AR Rahman. In an interview to ‘The Hindu’ which appeared in its December 25, 2010 issue, AR Rahman had revealed that the tune of this song was originally composed for one of the songs of ‘Lagaan’ (2001) but it was not used.

As stated earlier, some parts of the lyrics of the song are relevant to the journey of our musical caravan ‘driven’ by Atul ji in which many like-minded persons are fellow-travellers. Just like the faqeer in the film shows the direction of the destination to Shahrukh Khan in the picturisation of the song, Sudhir ji has been performing more or less, the same role in our musical caravan apart from providing other value additions. Other fellow travellers in our musical caravan have been contributing in their own ways to facilitate the blog with its intent.

Any journey through any form of conveyance has a final destination. But our musical caravan is a journey sans destination, although during the journey, there are intermediate destinations (milestones). So, for our musical caravan, journey becomes more important than the destination.

I have personally interacted with Atul ji only once and may be a couple of times through e-mails. But with my 7 years of association with blog, I feel that I know him through blog more than my interactions with him. Two lines of Allama Iqbal from his nazm, ‘Saaqi Nama’ perhaps sum up my impression about Atul ji in the context of his musical journey through the Blog:

bahut usne dekhe hain past o buland
safar usko manzil se badh kar pasand

He has seen many low and high (of this blog’s journey)
But for him, the (musical) journey is far preferable than any destination

I wish Atul ji many more happy and enchanting years of the musical journey of this blog.

(Video)

(Audio)

Song – Yun Hi Chala Chal Raahi (Swades) (2004) Singer – Udit Narayan, Kailash KherHariharan Lyrics – Javed Akhtar, MD – AR Rehman

Lyrics

pa ma sa ni ni dha pa ma
pa ma sa ni ni dha pa ma
ou ou ou ou ou
ou ou ou
ou ou ou ou ou
ou ou ou
ou ou ou ou ou ou
ou ou ou
ou ou ou ou ou
ou ou ou

yun hi chala chal raahi
yun hi chala chal raahi
kitni haseen hai ye duniya
bhool saare jhamele
dekh phoolon ke mele
badi rangeen hai duniya
rum tum taana na
ru tu tum tum taana na
rum tum taana na
ru tu tum tum taana na
rum tum taana na
ru tu tum tum taana na
bhaiya

hmm hmm aa aa aa
aa aa aa aa aaa
aa aa aa aa aaa
aa aa aa aa aa aaa
aa aa aa aa aa aaa

ye raasta hai kah raha ab mujhse
milne ko hai koi kahin ab tujhse
ye raasta hai kah raha ab mujhse
milne ko hai koi kahin ab tujhse
ho ho ho ho ho…ho ho ho …o
ho ho ho ho ho…ho..o
dil ko hai kyun ye betaabi
kis se mulaqaat honi hai
jiska kab se armaan tha
shaayad wahi baat honi hai
yun hi chala chal raahi
yun hi chala chal raahi
jeewan gaadi hai samay pahiya
aansoon ki nadiyaan bhi hain
khushiyon ki bagiyaan bhi hain
raasta sab tera takey bhaiya
yun hi chala chal raahi
yun hi chala chal raahi
kitni haseen hai ye duniya
bhool saare jhamele
dekh phoolon ke mele
badi rangeen hai duniya

ae na na na ae na na na
ae ae ae ae ae….e
dekho jidhar bhi in raahon mein
rang pighalte hain nighaaon mein
thhandi hawa hai thhandi chhaaon hai
door wo jaane kiska gaaon hai
baadal ye kaisa chhaaya
dil ye kahaan le aaya
sapna ye kya dikhlaaya hai mujhko..o..o
har sapna sach lage
jo prem agan jale
jo raah tu chale
apne mann ki..ee
har pal ki seep se
moti hi tu chune
jo tu sada sune
apne mann ki..ee
yun hi chala chal raahi
yun hi chala chal raahi
kitni haseen hai ye duniya
bhool saare jhamele
dekh phoolon ke mele
badi rangeen hai duniya

mann apne ko kuchch aise halka paaye
jaise kandho pe rakha bojh hat jaaye
jaise bhola saa bachpan phir se aaye..ae
jaise barson mein koi ganga nahaaye
jai..se..ey barso..o..on mein
koi ganga nahaaye..ae..ae..ae
dhul saa gaya hai ye mann
khul saa gaya har bandhan
jeewan ab lagta hai paawan mujhko..o..o
jeewan mein preet hai
honthon pe geet hai
bas yehi jeet hai
sun le raahi..ee
tu jis disha bhi jaa
tu pyaar hi luta
tu deep hi jala
sun le raahi..ee
yun hi chala chal raahi
yun hi chala chal raahi
kaun ye mujhko pukaare
nadiya pahaad jheel aur
jharne jangal aur waadi
in mein hain kiske ishaare
yun hi chala chal raahi
(aa aa aa)
yun hi chala chal raahi
(aa aa aa aa aaa)
kitni haseen hai ye duniya
(aa aa aa aa aaa)
bhool saare jhamele
(aa aa aa aa aaa)
dekh phoolon ke mele
(aa aa aa aa aa aaaa)
badi rangeen hai duniya

ye raasta hai kah raha ab mujhse
milne ko hai koi kahin ab tujhse
rum tum taana na
ru ru tum tum taana na
rum tum taana na
ru tu tum tum taana na
rum tum taana na
ru tu tum tum taana na..
bhaiya
pa ni sa ga ga ma ma
ma ma re re re ni sa
sa ni sa sa
sa ni sa sa
sa ni sa ga ga ga sa ma
ma ma sa pa pa
sa ni sa sa
sa ni sa sa
yun hi chala…aa chal aa aa aa
sa ni sa sa
sa ni sa sa
kitni haseen hai ye duniya aa aa aa
ou ou ou ou ou
ou ou ou
ou ou ouou ou
ou ou ou
pa ma sa ni ni dha pa ma

———————————————————
Hindi script lyrics (Provided by Sudhir)
———————————————————

प म सा नी नी ध प म
प म सा नी नी ध प म
उ उ उ उ उ
उ उ उ
उ उ उ उ उ
उ उ उ
उ उ उ उ उ उ
उ उ उ
उ उ उ उ उ
उ उ उ

यूं ही चला चल राही
यूं ही चला चल राही
कितनी हसीन है ये दुनिया
भूल सारे झमेले
देख फूलों के मेले
बड़ी रंगीन है ये दुनिया
रुम तुम ताना न
रु तु तुम तुम ताना न
रुम तुम ताना न
रु तु तुम तुम ताना न
रुम तुम ताना न
रु तु तुम तुम ताना न
भैया

हम्म मम्म आ आ आ
आ आ आ आ आss
आ आ आ आ आss
आ आ आ आ आ आss
आ आ आ आ आ आss

ये रास्ता है कह रहा अब मुझसे
मिलने को है कोई कहीं अब तुझसे
ये रास्ता है कह रहा अब मुझसे
मिलने को है कोई कहीं अब तुझसे
हो हो हो हो हो ॰॰॰ हो हो हो ॰॰॰ ओ
हो हो हो हो हो ॰॰॰ हो ॰॰॰ ओ
दिल को है क्यों ये बेताबी
किस से मुलाक़ात होनी है
जिसका कब से अरमां था
शायद वही बात होनी है
यूं ही चला चल राही
यूं ही चला चल राही
जीवन गाड़ी है समय पहिया
आंसूँ की नदियां भी हैं
खुशियों की बगियाँ भी हैं
रास्ता सब तेरा तके है भैया
यूं ही चला चल राही
यूं ही चला चल राही
कितनी हसीन है ये दुनिया
भूल सारे झमेले
देख फूलों के मेले
बड़ी रंगीन है ये दुनिया

ए ना ना ना ए ना ना ना
ए ए ए ए॰॰॰ए
देखो जिधर भी इन राहों में
रंग पिघलते हैं निगाहों में
ठंडी हवा है ठंडी छाँव है
दूर वो किसका गाँव है
बादल ये कैसा छाया
दिल ये कहाँ ले आया
सपना ये क्या दिखलाया है मुझको॰॰ओ॰॰ओ
हर सपना सच लगे
जो प्रेम अगन जले
जो राह तु चले
अपने मन की॰॰ई
हर पल की सीप से
मोती ही तु चुने
जो सदा तु सुने
अपने मन की॰॰ई
यूं ही चला चल राही
यूं ही चला चल राही
कितनी हसीन है ये दुनिया
भूल सारे झमेले
देख फूलों के मेले
बड़ी रंगीन है ये दुनिया

मन अपने को कुछ ऐसा हल्का पाये
जैसे कंधों पे रखा बोझ हट जाये
जैसे भोला सा बचपन फिर से आए॰॰ए
जैसे बरसों में कोई गंगा नहाये
जै॰॰से बरसो॰॰सों में
कोई गंगा नहाए॰॰ए॰॰ए॰॰ए
धुल सा गया है ये मन
खुल सा गया हर बंधन
जीवन अब लगता है पावन मुझको॰॰ओ
जीवन में प्रीत है
होठों पे गीत है
बस ये ही जीत है
सुन ले राही॰॰ई
तु जिस दिशा भी जा
तु प्यार ही लुटा
तु दीप ही जला
सुन ले राही॰॰ई
यूं ही चला चल राही
यूं ही चला चल राही
कौन ये मुझको पुकारे
नदिया पहाड़ झील और
झरने जंगल और वादी
इन में हैं किसके इशारे
यूं ही चला चल राही
(आ आ आ)
यूं ही चला चल राही
(आ आ आ आ आ)
कितनी हसीन है ये दुनिया
(आ आ आ आ आ)
भूल सारे झमेले
(आ आ आ आ आ)
देख फूलों के मेले
(आ आ आ आ आ)
बड़ी रंगीन है ये दुनिया

ये रास्ता है कह रहा अब मुझसे
मिलने को है कोई कहीं अब तुझसे
रुम तुम ताना ना
रु तु तुम तुम ताना ना
रुम तुम ताना ना
रु तु तुम तुम ताना ना
रुम तुम ताना ना
रु तु तुम तुम ताना ना
भैया

पा नी सा गा गा मा मा
मा मा रे रे रे नी सा
सा नी सा सा
सा नी सा सा
सा नी सा गा गा गा सा मा
मा मा सा पा पा
सा नी सा सा
सा नी सा सा
यूं ही चला॰॰आ चल आ आ आ
सा नी सा सा
सा नी सा सा
कितनी हसीन हैं ये दुनिया आ आ आ
उ उ उ उ उ
उ उ उ
उ उ उ उ उ
उ उ उ
पा मा सा नी नी धा पा मा


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