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Atul’s Song A Day- A choice collection of Hindi Film & Non-Film Songs

Archive for the ‘Shanker Mahadevan Solo Songs’ Category


This article is written by Sudhir, a fellow enthusiast of Hindi movie music and a regular contributor to this blog. This article is meant to be posted in atulsongaday.me. If this article appears in sites like lyricstrans.com and ibollywoodsongs.com etc then it is piracy of the copyright content of atulsongaday.me and is a punishable offence under the existing laws.

Blog Day : 3673 Post No. : 14559

ASAD 10th Anniversary Celebrations – 19
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मिले ना फूल
तो काँटों से दोस्ती कर ली॰ ॰ ॰

दस बरस पहले, एक सफर शुरू हुआ – एक सफर जिसका कुछ भी नियत नहीं था, कुछ निश्चित प्रयोजन नहीं था, कुछ आशा भी नहीं थी के ये सिलसिला जाने कब तक चले। बस सिर्फ एक धुन, और एक नग़मा – ले चला जिधर ये दिल निकल पड़े।

और साथ ये भी कह दिया कि मंज़िल कहाँ कहाँ रुकना है ऊपर वाला जाने॰ ॰ ॰

कुछ मालूम नहीं था ये सफर क्या शक्ल हासिल करेगा। क्या कोई हमसफर मिलेगा? मालूम नहीं, ये सोचा भी था के नहीं। लेकिन फिर भी क्या॰॰॰ एक ज़िंदगी का तार पकड़ कर चल दिये। और सोचा यूं कि चलते चलो चलता हुआ साहिल है ज़िंदगी। ये तो अच्छा किया कि दूर की सोची नहीं। अब तीन साल में क्या हो या पाँच सात साल में क्या होगा ऐसी हर फिक्र को धुएँ में उड़ाते हुये, बस एक दिन और एक गीत – इस क्रम पे चलना शुरू किया।

कहते हैं, जब कर्म और विचार में खोट नहीं, तो प्रकृति, दिशाएँ, तत्व, देव – सब कुछ ही साथ हो संबल देते है।  दस साल पहले जो सफर अकेले ही शुरू हुआ था, आज इन दस साल के बाद अब इसकी गिनती करोड़ों में होती है।  क्रम नहीं बदला, नीयत नहीं बदली – जो बदला वो बस यही के लोग साथ आते गये और कारवां बढ़ता गया।

दस साल बाद भी, आज कोई पूछे तो जवाब नहीं बदला – ये हँसता हुआ कारवां ज़िंदगी का न पूछो चला है किधर॰॰॰।

कितने पड़ाव आए और गुज़र गये, कितने ही मील पत्थर रास्ते में मिले और नज़रों से ओझल हुये।  इस सफर में हम कहाँ कहाँ से गुज़र गये – देस भी घूमा, दुनिया भी घूमी; सागर, नदियां, पर्वत, वादियाँ, जंगल और सैहरा, रास्ते और गलियाँ, पनघट और खलिहान, बाज़ार भी, मेले भी और अकेले भी – सब कोने छू लिए। कभी रेल में, तो कभी मोटर कार में, कभी घोड़े कि टापों के संग, तो कभी रिक्शे में। कभी बैल कि गाड़ी में घूमे, तो कभी तांगे के हिचकोले खाये। कशतियों में कभी झीलों का झरोखा, और कभी जहाज़ में समुद्र का दीदार किया। साइकल की सैर भी की, और कभी प्लेन से सारी धरती को देखा। और तो और, क्रेन, ट्रक और ट्रैक्टर को भी नहीं छोड़ा।

कभी हरी दर्शन को तड़पते मन देखे, कभी मदीने की दुआएं मांगी।  कभी बंजारों के गीत सुने, और तो फिर कभी सूफी के कलाम। बुद्ध कि शरण में गये तो कभी येशु के दर पे सर झुकाया। कभी सृष्टि के चित्रकार को ढूँढा, और कभी कर्म गति की शिक्षा सुनी। कभी शुक्राने फरमाए उस खुदा की बंदगी में, तो कभी ज़िंदगी से ऊब कर उसे खूब खरी खोटी भी सुनाई।

कभी किसी नाज़नीं से लहंगे कि फरमाइश सुनी, और कभी प्रेमी कि ज़ुबान से चाँद कि उपमाएँ। कभी बरसात ने दिल लुभाया, तो कभी बात बात में मैंने दिल तुझको दिया। कभी गर्मी की धूप से बचने की सलाह देखी, तो कभी बर्फ की सर्दी को दिल की आंच से कम होते देखा।

गोद में बच्चों को सुलाते हुये माँ कि लोरियाँ सुनी, तो कभी बच्चों से माँ के आँचल कि पुकार। नग़में सुने दोस्ती के और ग़ज़लें सुनी इश्क़ की।  मोहब्बत के जलवों से रोशन जन्नत के नज़ारे किए, तो कभी टूटे दिल के नालों ने हमें भी रुलाया।

कभी दिल मचला और झूम के गा उठा – किसान अपनी फसल देख के, फौजी छुट्टी पर घर जाते हुये, इक जवान दिल इश्क़ का इक़रार पा कर, और तो कभी बस इस कायनात की खूबसूरती पर।

कभी दिल रोया और रो कर गाया – भीख मांगते हुये बच्चे, कोई बिछड़ कर जाने लगा, कभी मोहब्बत के धोखे उठाए, और तो कभी किस्मत के थपेड़ों की शिकायत में।

कभी एक चोर की कहानी सुनी, कभी बिक्री वालों से उनकी उम्दा दलीलें सुनी, कभी मेहनतकशों की प्रेरणा भा गई, और तो कभी सड़क पे तमाशों के नज़ारे किए।

हुस्न की जल्वानुमाई देखि, तो कभी हुस्न के एहसान; कभी हुस्न की संगदिली ज़ाहिर हुई, तो कभी सिर्फ शिकवों का ज़िक्र हुआ। फ़लक पे सूरज चाँद और तारों की कहानी सुनी, तो कभी शराब की मस्ती शराबी की जुबानी सुनी।

फूलों से किसी कमसिन के चेहरे को मुक़ाबिल देखा, तो कभी किसी अल्हड़ की लापरवाह चाल से झरनों की उपमा हुई।

कसमें वादे होते देखे साँसों की हद तक, और कभी टूटे वादों के साथ दिल के टुकड़े बिखरते देखे।

कोई जश्न का मौका छूटा नहीं, कोई नाम अछूता रहा नहीं।

कभी धरती और देश के झंडे से बुलंद हुये, तो कभी इंसानी ज़ुल्म से हताश।

कभी शहीदों की कहानियाँ पलटीं, तो कभी भली आत्माओं का दर्शन किया।

सुख की घड़ियाँ, दुख के बादल; हंसी के लम्हे, आँसू की ढलकन; मिलने की खुशी, ना मिलने का ग़म; प्यार का झगड़ा, बेवफाई के ज़ख्म; बारात का बाजा, दिल का राजा; मंदिर का दीपक, खुदा से दुआएं; रिश्तों की संवेदना, और साथ ही वेदना; प्यार का फलसफा, और ज़िंदगी की तालीम।

कभी वो गीत में, कभी नज़्म में, कभी ग़ज़ल में, तो कभी भजन में, कभी ट्विस्ट में तो कभी डिस्को में; कभी क़व्वाली में, तो कभी सहगान में; कभी कविता जैसी लगी, तो कभी कथा जैसी; कभी तुम्हारी छवि दिखी, कभी उसकी; और तो ज़्यादा कहानी अपनी सी लगी।

दस साल। दस साल और पन्द्रह हज़ार उमंगें। रोज़ की नई नवेली। कभी लगता भी है कि पहले सुना था, लेकिन फिर भी लगता है नया सा। कितने सारे भावों की बरसात हुई है, क्या बेशुमार दौलत मिली है – दस साल में। नायाब खजाना है। और सोचो तो, शुरू कहाँ से किया था – “॰॰॰काँटों से दोस्ती कर ली॰॰॰”। मुनासिब ही तो है, ये दौलत काँटों से गुज़र के ही पाते हैं। और तमन्नाएं॰॰॰ उनका तो कहना ही क्या। कुछ मिल जाये, इसकी तो फिक्र कभी थी ही नहीं। बस एक ही बात, एक ही लगन॰॰॰ दिल चाहता है॰॰॰  साथ चलते रहें हम न बीते कभी ये सफर॰॰॰

जी हाँ, दिल चाहता है। जब एक गाना ढूंढ रहा था इस जश्न के लिए, तो मन बहुत घूमने के बाद इस बात पे ठहरा कि एक सफरनामा होना चाहिए, एक गाना जिस में बस सफर हो, कोई मंज़िल न हो। जिसमें बस हमख्यालों का दख़ल हो। जो सब मेरे हमकदम हों, मेरे हमनशीं, मेरे हमज़ुबाँ हों। अपनी यादों और आदतों से वहीं ढूँढता रहा साठ और सत्तर से पहले। इत्तेफाक़ देखिये, मिला तो बखूबी वही जो दिल चाहता है। हाँ ‘दिल चाहता है’ – फिल्म भी वही और नग़मा भी वही। 2001 में जारी हुई ये फिल्म मेंने उन्हीं दिनों में अपने सफरगुज़ारी के दौरान देखी। न जाने क्यों, इस फिल्म से मोहब्बत हो गई। और खास कर के इस गाने से। हल्की सी मस्ती की लहर में हल्का सा ढुलकता सा गाना, सुस्ताता हुआ, आलसी सा गाना, धीरे धीरे बहता जैसे बहार में सुबह कि मीठी सी सबा॰॰॰ लापरवाही में एक प्रतिबिम्बित चिंतन॰॰॰ गाना तो ऐसे मन को भाया के बस।

दिल चाहता है
कभी ना बीतें॰॰॰   चमकीले दिन
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी॰॰॰ यारों के बिन

होता है ना कभी कभी ऐसे ही। कुछ ऐसा कहा जाता है दो लफ्जों में, के और कुछ कहने की कसर बाकी रहती नहीं। जो बात मन की है, वो बस इतनी ही मुकम्मल है, जो ऊपर लिखे मिसरों में ब्याँ हो गई – तमन्ना है ये साथ चलते रहें हम न बीते कभी ये सफर॰॰॰

और कुछ कहना वाजिब नहीं।

इस फिल्म के ज़्यादातर किरदारों को पहली बार देखा था। बहुत सालों बाद एक हिन्दी फिल्म देखी थी शायद। मन को जम गई। 🙂

गीत जावेद अख्तर का लिखा है, संगीत बद्ध किया शंकर-एहसान-लोय कि तिकड़ी ने। गाने वाली आवाज़ शंकर महादेवन की है। स्क्रीन पर ये गाना बैक्ग्राउण्ड में फिल्माया गया। और क्या असरदार फिल्माया गया। गीत ही गीत सुनता है, बाकी सब खामोशी है। एक तुष्टि की, एक पूर्णता की खामोशी है। एक खुशी भरी सुस्ती की खामोशी है॰॰॰ जो दिल चाहता है वो मुझे मिला है॰॰॰ ऐसी खामोशी है

कभी ना बीतें॰॰॰   चमकीले दिन
हम ना रहें कभी॰॰॰ यारों के बिन

दस बरस, फिर एक और दस बरस, फिर एक और दस बरस॰॰॰ सिलसिलेवार

कभी ना बीतें॰॰॰   चमकीले दिन
हम ना रहें कभी॰॰॰ यारों के बिन

[Author’s Note: Apologies due on many counts, including the sudden and surprising change in the presentation language above. The writing started and then I just couldn’t stop the flow. And so I let it flow. In case there are requests, I can add the English translation also. Regarding the gap in celebration sequence, that story is coming up tomorrow. 🙂 ]

Song – Dil Chaahta Hai (Dil Chaahta Hai) (2001) Singer – Shankar Mahadevan, Lyrics – Javed Akhtar, MD – Shankar-Ehsaan-Loy
Chorus

Lyrics

dil chaahta hai

dil chaahta hai

dil chaahta hai
kabhi na beeten
chamkeele din
dil chaahta hai
hum na rahen kabhi yaaron ke bin
din din bhar hon
pyaari baaten
jhoomen shaamen
gaayen raaten
masti mein rahe dooba dooba hamesha samaa
hum ko raahon mein yun hi milti rahen khushiyaan
dil chaahta hai
kabhi na beeten
chamkeele din
dil chaahta hai
hum na rahen kabhi yaaron ke bin

jagmagaate hain
jhilmilaate hain apne raaste
ye khushi rahe
roshni rahe
apne waaste
jagmagaate hain
jhilmilaate hain apne raaste
ye khushi rahe
roshni rahe
apne waaste

oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo

jahaan rukey hum
jahaan bhi jaayen
jo hum chaahen
wo hum paayen
masti mein rahe dooba dooba hamesha samaa
hum ko raahon mein yun hi milti rahen khushiyaan

dil chaahta hai

dil chaahta hai

dil chaahta hai

dil chaahta hai

dil chaahta hai

kaisa ajab ye safar hai
socho to har-ek hi bekhabar hai
us ko jaana kidhar hai
jo waqt aaye
jaane
kya dikhaaye

oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo

dil chaahta hai
kabhi na beeten
chamkeele din
haan haan
dil chaahta hai
hum na rahen kabhi yaaron ke bin
din din bhar hon pyaari baaten
jhoomen shaamen
gaayen raaten
masti mein rahe dooba dooba hamesha samaa
hum ko raahon mein yun hi milti rahen khushiyaan
jagmagaate hain
jhilmilaate hain apne raaste
ye khushi rahe
roshni rahe
apne waaste
jagmagaate hain
jhilmilaate hain apne raaste
ye khushi rahe
roshni rahe
apne waaste

oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
(dil chaahta hai)
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
(dil chaahta hai)
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo
(dil chaahta hai)
oo oo ooo
ooo ooo oo ooo ooo ooo

dil chaahta hai

———————————————————
Hindi script lyrics (Provided by Sudhir)
———————————————————

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है
कभी ना बीतें
चमकीले दिन
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी यारों के बिन
दिन दिन भर हों
प्यारी बातें
झूमें शामें
गायें रातें
मस्ती में रहे डूबा डूबा हमेशा समां
हम को राहों में यूं ही मिलती रहें खुशियाँ
दिल चाहता है
कभी ना बीतें
चमकीले दिन
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी यारों के बिन

जगमगाते हैं
झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे
रोशनी रहे
अपने वास्ते
जगमगाते हैं
झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे
रोशनी रहे
अपने वास्ते

ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है
जहाँ रुकें हम
जहाँ भी जाएँ
जो हम चाहें
वो हम पाएँ
मस्ती में रहे डूबा डूबा हमेशा समां
हम को राहों में यूं ही मिलती रहें खुशियाँ

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है

दिल चाहता है

कैसा अजब ये सफर है
सोचो तो हर एक ही बेखबर है
उस को जाना किधर है
जो वक़्त आए
जाने
क्या दिखाये

ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss

दिल चाहता है
कभी ना बीतें
चमकीले दिन
हाँ हाँ
दिल चाहता है
हम ना रहें कभी यारों के बिन
दिन दिन भर हों
प्यारी बातें
झूमें शामें
गायें रातें
मस्ती में रहे डूबा डूबा हमेशा समां
हम को राहों में यूं ही मिलती रहें खुशियाँ
जगमगाते हैं
झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे
रोशनी रहे
अपने वास्ते
जगमगाते हैं
झिलमिलाते हैं अपने रास्ते
ये खुशी रहे
रोशनी रहे
अपने वास्ते

ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
(दिल चाहता है)
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
(दिल चाहता है)
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss
(दिल चाहता है)
ओ ओ ओss
ओss ओss ओ ओss ओss ओss

दिल चाहता है

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This article is written by Peevesie’s mom, a fellow enthusiast of Hindi movie music and a contributor to this blog.This article is meant to be posted in atulsongaday.me. If this article appears in sites like lyricstrans.com and ibollywoodsongs.com etc then it is piracy of the copyright content of atulsongaday.me and is a punishable offence under the existing laws.

Blog Day : 3660 Post No. : 14528

Hullo Atulites

The dust is yet to settle on the excitement of the 10th year celebration of the blog, a few more posts are awaited. Meantime something more awe-inspiring has occurred.

Our dear Shri. Arunkumar Deshmukh (also known as in-house encyclopaedia) in collaboration with Prof. Surjit Singh has come out with a book titled “Forgotten Artists of Early cinema and The Same Name Confusion”. The book has a foreword by Shri. Sanjit Narwekar. The book (in guruji’s words) is “the result of my work over the last so many years and is based primarily on my articles posted on our blog and elsewhere-duly abridged and edited to suit a book.” (I have copied this quote from the mail he has sent to all of us viz: his fellow-atulites) Hats-off to you Sirji, guruji. And to think that this is his passion from the late 40s – seeing movies. His habit of making notes about every film he saw in notebooks (I have seen a few notebooks). Post 2011 he made baby-steps into Cyber world, discovered this amazing blog, made his first comments and on encouragement from our ring-leader Atulji posted articles on films ranging from the 30s to 2018 using the notes he has made over the years. Era-no-bar as far as Guruji is concerned, the only qualification needed he should fall in love with the song. (Most of what I have written are quotes and utterances by guruji in many of his posts and the occasional conversation I have had with him over the years. I am sorry for any misquotes.)

Today is Kargil-Divas when the nation thanks and pays homage to the men-in-uniform who fought the enemy in in-hospitable conditions of the Siachen Glacier in 1999 and regained control of territory that was intruded.

In the month of May I had a holiday in the North-east region of the Himalayas. We visited Nathu-La Pass and a temple dedicated to Baba Harbhajan Singh. It is a known fact that Nathu-La Pass is a strategically important location for the Indian army on the Indo- China border and only a few visitors per day are given permission to visit the place. But the little known mandir is what fascinated me. It is not a mandir to a religious head but a Samadhi to a Captain of 18 Rajput Regiment who is revered as the “Hero of Nathu-La”. He joined the Indian Army as a soldier at 19 and was posted in various regiments before being posted to the 18 Rajput in Nathu-La, East Sikkim at the time of his untimely death.

We heard and read different versions of his heroism. One story said that he fell into a gorge or nullah as he was escorting a Mule- column from Tuku-La to Dongchi-La, his body was swept away and recovered about 2-miles away. He is said to have appeared in the dreams of his fellow-soldiers and asked them to build the samadhi. Another story says that the soldiers posted in and around Nathu-La and its inhospitable environment are protected by the spirit of Baba (captain) Harbhajan Singh. Whatever be the story/ legend one thing is for sure- the Indian Armed forces should be saluted for the kind of service that they do selflessly, day-in and day-out year after year. And without an iota of complaint about the working conditions – be it the deserts of Rajasthan or the glaciers of the Himalayas. I have visited both the terrains and my respect for the Forces has only increased.

On the occasion of Kargil Divas we should have a song dedicated to the forces and the hard training that they undergo so that they can protect us. For this I am revisiting the 2004 Farhan Akhtar directed Lakshya which starred Hrithik Roshan and Preity Zinta with Amitabh Bachchan and a host of other actors. This is a song sung by Shankar Mahadevan written by Javed Akhtar and Shankar- Ehsaan-Loy are the music directors. The song is shot mostly on location at the Indian Military Academy in Dehradun. The song closes with the gentlemen cadets finishing their training and stepping on a mat which says “Antim Pag”.

This year (2018) was a proud year for my best-friend-forever when her elder son joined the ranks of military men, graduating into a gentleman officer from IMA Dehradun, following the footsteps of his Grandfather and Father. Feel proud to be a associated with that family.

Just a coincidence -Guruji has also reached a “Lakshya”

Video

Audio

Song-Haan yahi rasta hai tera toone ab jaana hai (Lakshya)(2004) Singer-Shankar Mahadevan, Lyrics-Jawed Akhtar, MD-Shankar Ehsan Loy
Chorus

Lyrics (based on audio)

haan yahi rasta hai tera
toone abb jaana hai
haan yahi sapna hai tera
toone pehchaana hai

haan yahi rasta hai tera
toone abb jaana hai
haan yahi sapna hai tera
toone pehchaana hai
tujhe abb yeh dikhaana hai
roke tujh ko aandhiyaan
ya zameen aur aasmaan
paayega jo lakshya hai tera
lakshya toh
har haal mein paana hai
oooo
oooo
oooo
oooo
oooo
oooo

mushqil koi aa jaye toh
parbat koi takraaye toh
taakat koi dikhlaaye toh
toofaan koi mandlaaye toh
mushqil koi aa jaye toh
parbat koi takraaye toh
barse chaahe ambar se aag
lipte chaahe pairon se naag
barse chaahe ambar se aag
lipte chaahe pairon se naag

paayega jo lakshya hai tera
lakshya toh har hal mein paana hai

himmat se jo koi chale
dharti hiley kadmon taley
kya dooriyaan kya faasle
manzil lage aake galey
himmat se jo koi chaley
dharti hiley kadmon taley
tu chal yoonhi abb subah-o-shaam,
rukna jhukna nahin tera kaam
tu chal yoonhi abb subah-o-shaam,
rukna jhukna nahin tera kaam

paayega jo lakshya hai tera
lakshya toh har haal mein paana hai
oooo
oooo
oooo
oooo
oooo
oooo

haan yahi rasta hai tera
toone abb jaana hai
haan yahi sapna hai tera
toone pehchaana hai
tujhe abb yeh dikhaana hai
oooo
oooo
oooo
oooo
oooo
oooo


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